रात १० बज के २ मिनट हुए होंगे..
मै ऑफिस के लिए घर से निकला था..
कि उसका कॉल आया..
बहुत दिनों बाद..
आखिर उसके एग्जाम खत्म जो हो चूके थे..
फोन उठाया तो उसकी धडकने गुनगुना रही थी.. कोई धुन
पर मुझे अनुभूति अपने नाम कि हुई..
जो उसकी साँसों में गूंज रहा था..
........................................
सड़क पर था.. तो ट्रैफिक.. का शोर..
पर ध्यान से सुन रहा था उसकी आवाज़..
और उसकी बातें..
हंसी..
और आज तो वो मुझ पर चिलाए भी.. पहली बार
..........................................
बातों में दिन-रात
शाम- सुबह..
फूलों का जिक्र..
और उसकी प्रिय मछलियाँ..
जिन के पास वो खड़ा था..
और बता रहा था उनके बारे में मुझे...
बातों में मुझे और हाथों से उन्हें छेड रहे थे..
तभी एक मछलि ने उसके हाथ को काटा..
और उसे लगा मैंने..
तो बड़े प्यार से कहा निर्वाण..
ये क्या कर रहे हो..
मैंने विस्मय भरे भाव से पूछा मैंने क्या किया...??
सड़क पर चल रहा हूँ..
और तुमसे बातें कर रहा हूँ..
"हू" जब देखो तब शरारती..
माना आज अकेले हो घर में तो..
जो मन आएगा वो करोगे...
हम्म
वो हंसते हुए बोला आज तो सब कुछ करूँगा मौके का फायदा.. उठाऊंगा..
मैंने भी आवाज़ में कडक पन लाते हुए कहा हो गई बात..
चलो फोन रखो और जा के सो जाओ..
उसने कहा तुम भी आओ ना..
साथ में सोते हैं..
मै: नही मुझे ऑफिस जाना है
जब देखो तब काम..
मेरे लिए तो समय ही नही है.. उदास आवाज़ के साथ..
मैंने मनाते हुए कहा..
तुम्हारे लिए हर पल समय है..
तुम हर पल मेरे साथ हो..
पर जानते हो ना ये भी जरुरी है..
हाँ ठीक है..
अच्छा ये बताओ कितनी देर में पहुंच जाओगे..
मैंने कहा गेट के सामने हूँ..
बस १०:४५ पर अंदर चला जाऊँगा..
ओह केवल ५ मिनट..
तो उदास क्यूँ..
उसे हसने के लिए.. मैंने धीरे से कहा..
हे.. शहद चखोगे..
वो गुस्से से
नी चखना..
पर मै तुम्हे चखना चाहता हूँ..
और लिखना चाहता हूँ..
तुम्हारे होंठों पर..
शहद से प्यार
.....................................
फोन पर उसको
प्यार भरी "kiss"..
और दिल कि धडकनों ने गा दिया.. कई दिनों से
एक अधूरा गीत..
"प्रेम मधुर संगीत.."
और फोन कट करने से पहले उसे "good night" wish कि..
और चल दिया गुनगुनाते हुए..
अधूरा गीत..
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चाँदनी रात और एहसास.. अक्सर यूँही ढल जाते हैं..
और लिख देता हूँ..
शहद से उसके होठों पर प्रेम मधुर संगीत.. "दिव्यंकर"
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