अमलताश...!!
February 3, 2014 at 9:31pm
मुझे "अमलताश" के पीले पुष्प बहुत पसंद हैं..इनमे महक तो नही होती
पर फिर भी ये जीवन को महका जाते हैं..
अमलताश....!!
पीले रंग के फूल खिलते हैं.. तो ये अमलताश का वृक्ष देखते ही बनता है..
भोर के समय में या चाँदनी रात में इसकी सुंदरता देखते ही बनती हैं..
ऐसे में कब इसके पुष्प और इसकी छाँव ने मुझे मोह लिया मैं नही जानता पर आज भी जब देखता हूँ पीले पुलों से लदे अमलताश के वृक्ष को तो कुछ अतीत के पन्ने खुल जाते हैं.. और खिल जाते हैं पीले पुष्प..
ऐसे में कल बसंत और सब कुछ पीला..
उन्ही पीली सुनहरी यादों में ढूबे कुछ लाल शब्द..
कल बसंत हैं..
और खिल रहा है..
अमलताश..
हाँ आज वो वृक्ष थोडा बड़ा है..
पर फूलों से लद कर वो छोटा ही दिख रहा हैं..
तुम तोड़ सकते हो..
बिना किसी संकोच के..
और सजा सकते हो अपने कमरे में..
अमलताश..
आज भी याद है..
जब तुम तोड़ रहे थे..
अमलताश और तुम्हारा हाथ नही पहुंच रहा था..
ऐसे में तुमने आवाज़ दि..
मैं अनजान था..
पर कहा जरा मदद करो
तो तुम मेरी मदद से चढ़ गए पेड़ पर..
और तोड़ने लगे..
पीले पुष्प..
तोड़ने के बाद मुझे थमा दिए..
और कहा देखो टूटे ना..
थामते हुए एक गिरा तो चिल्ला दिए..
ढंग से पकडो..
तुममे शैतानी थी..
और चंचल पन..
पर उतरते हुए तुम्हे चोट लग गई..
ऐसे में तुम्हे थामे..
एक हाथ में तुम्हारा हाथ..
और तुम्हारे एक हाथ में पुष्प..
और तुम्हारे होंठों पर संगीत..
अदभुत वो दृश्य आज भी छलक उठता है..
और बह उठता है..
मैं तुम्हारे साथ चल रहा था..
एक अनजान डगर एक अनजान साथ..
ना मंजिल का पता..
पर हाथ इस विश्वास के साथ पकड़ा था कि कभी छोड़े गे नही..
तुम्हारे घर पहुंचे..
बाहर से जाने को कहा था..
कहा अंदर आओ दोस्त..
यंहा तक आए हो तो अंदर आओ
तुम्हारे निमत्रण को अस्वीकार कैसे करता
अंदर गया तो माँ ने पूछा ये कौन..
तुमने कहा ये दोस्त हैं मेरा...
कुछ अजीब था..
पर अच्छा लग रहा था..
तुम्हारे साथ कमरे में..
तुम जितने चंचल तुम्हारा कमरा उतना सादा..
पढ़ने कि मेज व्यवस्थित ढंग से...
और किताबों का अच्छा संग्रह..
और एक तरफ कुछ अमलताश के पुष्प..
और कृष्ण कि प्रतिमा..
जिसने मेरे मन को मोहा..
तुमसे अलविदा लेकर घर आया तो..
बस आज मेरे चहरे पर खिल रहे थे अमलताश के पुष्प..
.....
शाम का वो समय जब तुम्हे अचानक देखा अमलताश के वृक्ष के नीचे..
तुम बैठे हुए थे..
और कुछ लिख रहे थे..
संकोच वश
पर तुम्हे हेल्लो बोला तुमने पहचान लिया..
कहा बैठो..
तो मै बैठ गया...
बातों के सिलसिले..
ऐसे में सवाल और जवाब..
......
to be continued




