मेरी हसरत...!!
................................................................................
सिमटती है..
बिखरती है..
एक ख्वाब सी रोज़ रात को सजती है.. मेरी हसरत...!!
कभी लूटने को..
कभी लुटाने को..
बेताब रहती है.. मेरी हसरत...!!
कभी खिलती है..
कभी महकती है..
कभी मुरझा सी जाती है.. मेरी हसरत...!!
कभी नगमा..
कभी कोई गीत..
कभी गज़ल बन गुनगुनाती है.. मेरी हसरत...!!
कागज पर श्याही में लिपट कर शायरी तो..
कभी कविता बन जाती है.. मेरी हसरत...!!
शाम को चराग सी..
रात को ख्वाब सी..
जल जाती है.. मेरी मेरी हसरत...!!
कभी आसुंओं में..
कभी मुस्कान में.. बह उठती है.. मेरी हसरत...!!
सिलवटों सी चादर पर..
उँगलियों से रेत पर..
भीड़ में खामोशियों से बहुत कुछ लिख जाती है.. मेरी हसरत...!!
किसी को देख कर
देखते रह जाना..
फिर सोच में उसे शामिल कर लेना..
फिर सोचते हुए बीत जाती है.. मेरी हसरत...!!
मिली है जब किसी से नज़र यूँ इतेफ़ाक से..
खिल जाती है लबों पर मुस्कान तो ऐसे में
थोडा बहक..
थोडा लजा..
थोडा शर्मा सी है .. मेरी हसरत...!!
जाते जाते उसका यूँ देखना..
कि पलट कर मेरा भी उसे मुड कर देखना
फिर मुस्कुरा कर खुद को समेट लाती है .
अपनी राह पर . मेरी हसरत...!!
चाँदनी रात में..
तारों कि छांव में..
ठंडी हवा के स्पर्श से..
थोडा सिहर जाती है ..मेरी हसरत...!!
बरसात हो या हो बादल का गर्जना..
मन में एक लहर
और कई तरंगे सी बन उठ के छलक जाती है.. मेरी हसरत...!!
पाक है..
साफ़ है..
छोटे बच्चे सी मासूम है..
दिल नशीं.. बाअदबबड़ी दिलकश..
नाजो अंदाज़ से भरपूर..
दुआओं के लफ्ज़ लिए..
आखें हो नम फिर भी हंसी बेपाक लिए..
पर अक्सर ना जाने क्यूँ..??
मचल जाती हैं
मेरी हसरत...!!
................................................................................ " दिव्यंकर"
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सिमटती है..
बिखरती है..
एक ख्वाब सी रोज़ रात को सजती है.. मेरी हसरत...!!
कभी लूटने को..
कभी लुटाने को..
बेताब रहती है.. मेरी हसरत...!!
कभी खिलती है..
कभी महकती है..
कभी मुरझा सी जाती है.. मेरी हसरत...!!
कभी नगमा..
कभी कोई गीत..
कभी गज़ल बन गुनगुनाती है.. मेरी हसरत...!!
कागज पर श्याही में लिपट कर शायरी तो..
कभी कविता बन जाती है.. मेरी हसरत...!!
शाम को चराग सी..
रात को ख्वाब सी..
जल जाती है.. मेरी मेरी हसरत...!!
कभी आसुंओं में..
कभी मुस्कान में.. बह उठती है.. मेरी हसरत...!!
सिलवटों सी चादर पर..
उँगलियों से रेत पर..
भीड़ में खामोशियों से बहुत कुछ लिख जाती है.. मेरी हसरत...!!
किसी को देख कर
देखते रह जाना..
फिर सोच में उसे शामिल कर लेना..
फिर सोचते हुए बीत जाती है.. मेरी हसरत...!!
मिली है जब किसी से नज़र यूँ इतेफ़ाक से..
खिल जाती है लबों पर मुस्कान तो ऐसे में
थोडा बहक..
थोडा लजा..
थोडा शर्मा सी है .. मेरी हसरत...!!
जाते जाते उसका यूँ देखना..
कि पलट कर मेरा भी उसे मुड कर देखना
फिर मुस्कुरा कर खुद को समेट लाती है .
अपनी राह पर . मेरी हसरत...!!
चाँदनी रात में..
तारों कि छांव में..
ठंडी हवा के स्पर्श से..
थोडा सिहर जाती है ..मेरी हसरत...!!
बरसात हो या हो बादल का गर्जना..
मन में एक लहर
और कई तरंगे सी बन उठ के छलक जाती है.. मेरी हसरत...!!
पाक है..
साफ़ है..
छोटे बच्चे सी मासूम है..
दिल नशीं.. बाअदबबड़ी दिलकश..
नाजो अंदाज़ से भरपूर..
दुआओं के लफ्ज़ लिए..
आखें हो नम फिर भी हंसी बेपाक लिए..
पर अक्सर ना जाने क्यूँ..??
मचल जाती हैं
मेरी हसरत...!!
................................................................................ " दिव्यंकर"
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