Monday, 23 December 2013

मौत एक हसीं सफर है... जंहा लोग पीछे चलते हैं धीरे धीरे.....

मौत एक हसीं सफर है...
जंहा लोग पीछे चलते हैं धीरे धीरे.....
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मै मौत कि तरफ बढ़ रहा हूँ धीरे धीरे..
हर रोज़ हर पल "मर" रहा हूँ धीरे धीरे..
एक रास्ता है लम्बा..
और तन्हा सफर है.. पर थक हार कर मै चल रहा हूँ धीरे धीरे..
कई गुनाह किए..
हर बार किए..
इस बार एक और सही धीरे धीरे..
किसी को जो रुलाया हो कभी
तो अब हंसा के जाऊँगा
गुदगुदा के जाऊँगा मै धीरे धीरे..
मै मौत कि तरफ बढ़ रहा हूँ धीरे धीरे..
नए रिश्ते बन रहे हैं..
पुराने छुट रहें हैं मौत से एक रिश्ता और सही धीरे धीरे..
बड़ी वफा से निभाऊंगा...
इतना तो यकीन है याद आऊंगा..
पर इतना भी यकीन है तुम भूला  भी दोगे मुझे एक दिन धीरे धीरे..
मै मौत कि तरफ बढ़ रहा हूँ धीरे धीरे..
कुछ अधूरे किस्से रह गए..
कुछ बातें अधूरी..
मेरी एक नज्म अधूरी..
पर कोशिश है करूँगा पूरा मौत से धीरे धीरे..
मै मौत कि तरफ बढ़ रहा हूँ धीरे धीरे....  "दिव्यंकर"

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