Saturday, 28 December 2013

लाल रंग..!!

"लाल रंग..."

उगते "सूरज" का..
ढलती "शाम" का..
तेरे "इंतज़ार" में
रात भर जागी और रोई मेरी "आँख" का..
मेरी "हथेली" पर लिखे तेरे "नाम" का..
मेरे "दिल" में बसी तेरी "तस्वीर"  का..
"लबों" पर आई "दुआ" का..
तेरे लिए खरीदे गए "गुलाब" का.. "दिव्यंकर"
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कल उदास रात थी..
तुम तो दूर थे ही और चाँद भी छिप के जा बैठा था बादलों में..
ऐसे में लिख दिया चादर पर आँसुओं से लाल रंग "दिव्यंकर"

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जब तुम्हे याद करता हूँ..
या अपनी सोच में शामिल..
या तन्हा सफर में
ढूंढता हूँ तुम्हारे अक्स को अपने चारों तरफ..
तो लौट आता हूँ.. अधूरे सफर से ये सोच कर कि कंही पीछे खड़े मेरा इंतज़ार कर रहे हो..
पर तुम नही मिलते.... तो आ कर अपने कमरे में..
ऐसे में दीवरों पर टंगे कैलेंडर पर लिख देता हूँ.. "लाल रंग"
और कुछ लाल रंग सज़ा लेता हूँ..
अपनी डैरी में.. "दिव्यंकर"

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