Tuesday, 25 March 2014

तुम वापस आ जाओ..!!

तुम वापस आ जाओ....!!

कल रात किसी के द्वारा दि गई एक तस्वीर और शीर्षक पर कुछ लिखने का प्रयास .. आशा है आप सबको पसंद आएगा.. और आपके दिल तक जरुर पहुंचेगी.. !!
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रात नौ बज कर तीस मिनट... (९:३०) और तारीख ३१-१२-२०१३..
वही दिन वही समय बस साल अलग है..
याद है..!!
वो ३१-१२-२०१२ कि रात जब हम पहली बार मिले थे..
भूल भी कैसे सकते हो..
एक साल का लम्बा इंतज़ार जो खत्म हो रहा था..
तुमसे मेरा और मेरा तुमसे मिलने का..
ऐसे में जो मेरा हाल था शायद वही तुम्हारा..
आखिर वो दिन आ ही गया
जब हम मिलने वाले थे..
और अपने प्यार कि एक नई शुरुवात जो होने वाली थी..
शुरुवात एक नए कल कि
और
शुरुवात एक नए साल कि.... !!
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पहली बार जब तुमसे बात कि थी फेसबुक पर तो बात झगड़े से शुरू हुई..
और ये झगड़ा कब दोस्ती दोस्ती से प्यार में बदल गया पता ही नही चला..
एक दूसरे से ज्ञान कि बातें बाटते बाटते कब हम प्यार बाटने लगे नही पता..
मै तो आज भी वो दिन कर के हंस देता हूँ..
जब तुमने कहा था बुद्धू महाशय अपना नॉ दो.. तुम्हे फोन पर समझाऊंगा कि
"protein modulation" मैंने भी कहा ठीक है.. ये नॉ है *******६०१ और हाँ शाम को ७ बजे के बाद..
तुमने कहा ठीक है पता है..
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पुरानी बातों कि जितनी परतें खोलो तो एक नई परत खुल जाती है..
और ताज़ा हो जाता है कोई भूला बिसरा किस्सा..
याद है २८-१२-२०१२ जब हमने मिलने का फैसला किया था
फोन पर लम्बी बातऔर फिर एक दूसरे से मिलने का वादा..
कि तय समय तय वक्त पर एक दूसरे से जरुर मिलेंगे..!!
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२९-१२-२०१२ और ३०-१२-२०१२

फेसबूक और phone msgs के जरिये एक दूसरे से बात और बार बार बस मिलने कि खुशी का इंतज़ार.
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३१-१२-२०१२
आखिर वो दिन आही गया..
रोज़ कि तरह सुबह उठ कर अपनी दिनचर्या में लगा रहा..
मन में एक खुशी और साथ ही एक डर
और ऐसा लग रहा था आज मैं किसी और दुनिया में हूँ.. और मेरे music system में बज रहे थे तो बस लता जी के गाने..
"आज कल पांव जमीं पर नही पड़ते मेरे..
बोलो क्या देखा है तुमने मुझे कभी उड़ते हुए"
और कब दिन से शाम और शाम से रात हो गई पता ही नही चला..
रात ८ बज कर १५ मिनट..
मैंने माँ से कहा मैं न्यू इयर पार्टी के लिए जा रहा हूँ..
शाम रात को ११ बजे तक आजाऊंगा..
हाँ पार्टी में जाना महज एक बहाना था.. तुमसे मिलने जो आना था..
अपने कमरे में गया तो २० मिनट इसी में लग गए कि क्या पहनू.. फिर ध्यान आया..
तुम्हे लाईट स्काई ब्लू कलर बहुत त पसंद हैं तो बस अपनी अलमारी से निकली और पहन ली..
झट पट तैयार हुआ..
तुम्हे देने को जो गुलाब और तुम्हारी पसंद कि चॉकलेट खरीदी थी बैग में डाली और घर से निकल पड़ा..
मेरे घर से २० मिनट कि दुरी पर था तो पैदल ही आया..
इस वक्त दिल कि धडकने बहुत तेज थी और साथ ही सांसों कि रफ्तार..
बार बार लम्बी साँसे लेता और छोड़ता..
आखिर पहुंच गया तय समय से ३० मिनट पहले..
और देखने लगा चरों तरफ..
तो दूर तक कोई नही था..
सड़क सुनसान..
बस थी तो एक सड़क मुझ तक आती थी या मुझसे हो कर जाती थी.. नही पता..
तभी दूर से कोई आता हुआ दिखा..
शायद तुम थे..
हाँ तुम्ही तो थे..
तेज कदमों से मेरी तरफ बढते हुए..
मैंने फोन निकाला और कॉल कि..
तुमने उठाया तो समझ गया तुम ही हो..
रेड शर्ट., ब्लैक हाल्फ जैकेट और क्रीम ट्राउजर..!!
तुम्हे देख पाता कि तुम सामने खड़े थे..
हे कैसे हो.. बढिया
और तुम....मै भी..

वो: देर तो नही कि..
मैं: नही मै ही जल्दी आगया था.. और हम हंस दिए हम दोनों उस सुनसान सडक पर कुछ गूंज रहा था तो हमारी हंसी..
बातें हो रही थी..
और मैं बस उसे देख रहा था और मेरी पलकें झपक भी नही रही थी..

मै: बैग को कंधे से उतारते हुए ये तुम्हारे लिए..
वो: क्या है ये..
मैं: खुद ही देख लो..
वो: गुलाब और चॉकलेट “शुक्रिया”
मैं: शुक्रिया “हू..”

वो: अच्छा बाबा नही बोलता..
खुश
मैं: चहरे पर एक हंसी लिए.. हाँ खुश..
वो: यंही बात करोगे चलो कंही चलते हैं किसी café ya restaurant बहुत भूख लग रही है..
तुमसे मिलने आने कि जल्दी में कुछ खाया भी नही..
मै: तो मैंने कौन सा खाया है..
वो: फिर चलो
चलते चलते..
मै: वैसे एक बात कहूँ
वो: हर बार कहा है जो कहना हो कह दिया करो.. पूछा मत करो..
बोलो
मैं: तुमने बहुत सुन्दर हो

वो: तुम भी अच्छे लग रहे हो.. ब्लू शर्ट.. में..
मै: हाँ तुम्हे पसंद हैं ना इसलिए..
तुम्हारी एक एक छवि को दिल में भर रहा था..
और हमारे जिस्म दूर थे पर सांसों से उठता धुंआं एक दूसरे को छु रहा था..

आखिर राह चलते तुमने मेरा हाथ अपने हाथ में लिया और कहा..
हे आज कुछ कहो सिर्फ मेरे लिए..
मैं कहना तो बस कुछ चाहता हूँ
पर आज बस इस लम्हे को जीना चाहता हूँ..
और तुम्हारे साथ इस साल को विदा करना चाहता हूँ..

हम restaurant पहुंचे तो तुमने अपनी पसंद का खाना मंगवाया हमने एक ही थाली में खाया और तुमने मुझे अपने हाथों से खिलाया.. मैं खुश था और कब आँसू निकल गए पता ही नही चला..
तुम हे क्या हुआ..
क्यूँ रो रहे हो..
कुछ नही बस ऐसे ही..

... आखिर १० बज कर १५ मिनट अच्छा अब चलना चाहिये..
मैंने तुम्हे ऑटो स्टैंड तक छोड़ा और जाते जाते तुमने अपनी जेब से छोटा सा गिफ्ट निकला और कहा घर जा के देखना..
घर आया तुम्हे कॉल कि पहुंचे उसने कहा बस ५ मिनट और तुम..
मै अपने बेड पर हूँ..
और तुमने कहा ठीक है आराम करो..
मै पहुंच कर msg कर दूँगा..
मैंने गिफ्ट खोला तो देखा उसमे एक खूबसूरत बॉक्स जिसमे एक मोती और कुछ गुलाब कि पंखुडियाँ.. और एक कागज पर कुछ पंक्तियाँ
जड़ा कर अंगूठी में ये मोती तुम पहन लेना..
और स्वीकार करना मेरा प्रेम..
मेरे चहरे पर खुशी.. तुम देख पाते..
............

१ जनवरी २०१३ सुबह उठ कर तुम्हे न्यू इयर कि बधाई..
और फिर बात..

अब बातों में शरारतें.. थी
और मिलने के सिलसिले..
याद है ४ जनवरी जब तुमने मेरे हाथ में अंगूठी देखी तो चूम लिया था मेरे गालों को
आज भी वो एहसास मेरे गालों पर है..
अब हम एक दूसरे के घर आने जाने लगे.. और तुमने मेरे घर में एक फूलदान में बोया था गुलाब..

मेरे जन्म दिन १८ अप्रैल को तुमने मेरे लिए जो किया वो बहुत खास था..
पहले मंदिर फिर दिन भर मस्ती और शाम को
गंगा किनारे नदी में दिए बहाना.. पता था तुम्हे कि क्या पसनद हैं..
उसदिन हमने टॉफी भी बाटी थी हर एक बच्चे को पुरे दिन जो मिला..
सब याद है..

और याद क्यूँ ना हो तुमसे जो जुडी हैं सब बातें..
आज जून २०१३ २४ तारीख सुबह तुम्हारा कॉल आया मिलना मुझे
हम बाइक लेने चलेंगे पापा ने finance करा दि है..
तुम खुश थे. और तुम्हारी खुशी मुझ से..
बाइक ली मंदिर फिर घर..
और फिर पुरे दिन हवा से बातें..
.......

जुलाई २०१३ तारीख ७ कभी नही भूल सकता
कैसे भूलूं नही भूल सकता
तुम tuition से घर जा रहे थे..
और मेरे से बात कर के कहा आज नही सकता कल आऊंगा माँ को लेकर जाना है कंही..
मैंने कहा ठीक है आराम से बाइक चलाना..
तुमने कहा ठीक है..
अच्छा कल मिलता हूँ..
रात ८ बजे तुम्हे कॉल कि तो पापा ने उठाया
मैंने कहा नमस्ते अंकल उन्होंने कहा नमस्ते कैसे हो बेटा अंकल बढिया..
दिव्यंकर कंहा है..
वो admit है tuition आते हुए उसका accident ho gya
अंकल क्या कंहा हो आप लोग अभी..
बेटा सिटी हॉस्पिटल बस थोड़ी देर में देल्ही के लिए निकल रहें हैं..
क्या..??
आँखों में आँसू..
माँ मैं अभी आया
क्या हुआ रो क्यूँ रहा है..
कुछ नही आता हूँ..
जिस हाल में था वैसे ही सिटी अस्पताल गया..
पर तुम्हे देल्ही ले जा चूके थे..
क्या करूँ कंहा जाऊं कुछ समझ नही आरहा था..
अब तो तुम्हारा नॉ भी बंद
अगले दिन घर गया तो लोगों कि भीड़ मै समझ गया तुम्हे नही देख पाता इस हालत में तो घर के एक कोने में खड़ा हो गया..
और तुम्हारे साथ कुछ कदम कि दुरी तय कि..
और वो आखरी पल थे जब मैं तुम्हारे साथ चला था..
........
अभी यंकी नही होता कि तुम नही हो..
तुम तो हर जगह हो जंहा जंहा हमने खूबसूरत पल बिताए..
......
आज एक साल है हो रहा है हमारे अतुल्य प्रेम को..

और मै तय समय से पहले ही पहुंच गया हूँ..
तुम्हारे इंतज़ार में..
कि तुम आओगे..
तुम आओगे और गुद्गुदाओगे..
३१-१२-२०१३
वही तारीख वो ही दिन बस अलग है तो साल..
वो ही स्ट्रीट लाईट का खम्बा और उसपर पतंगे..
मेरे हाथ में तुम्हारे लिए गुलाब..
आज भी मैंने ब्लू शर्ट पहनी है..
तुम्हे पता है अब तो हर रोज़ मैं टॉफी बाटता हूँ
........
आज तुम्हारे लिए कुछ लिख कर लाया हूँ..
सुनाता हूँ रुको..
तुम वापस आजाओ..
फिर ना जाने के लिए..
बेरंग सी है मेरी दुनिया..
कोई रंग तो भर जाओ..
तुम वापस आजाओ..
गुलाब खिलते हैं..
पर महकते नही..
एक उम्मीद का गुलाब फिर से महका जाओ..
तुम वापस आजाओ..
सर्दी बहुत हैं और सर्द हवा भी..
कहोरे में लिपटी ये जमीं भी..
रेजा रेजा है पेड़ों के पत्ते..
सर्द आलम में
ठिठुरी ठिठुरी मेरी आरजू भी कंही..
ये दिसम्बर यँ ही बीत गया..
ये साल आधा तेरे बैगर ही गुजर गया..
दिवाली में तेरे नाम के इंतज़ार के..
कुछ दीप जलाये और बहा दिए गंगा में..
और साथ ही कुछ गुलाब भी..
कि तुम्हारी राह रोशन हो..
कि महकती रहे
उसी महकती राह से रौशनी के अक्स में तुम वापस आजाओ.. “दिव्यंकर”

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