Tuesday, 25 March 2014

सोचा किया.. "तुझे" विचार किया.. मैंने कई कई बार किया...!!

सोचा किया.. "तुझे" विचार किया.. मैंने कई कई बार किया...!!

सोचा किया,
तुझे
विचार किया,
मैंने कई-कई बार किया,
कैसे कहूं गुज़रे वक़्त को,
मै कैसे कई-कई बार जिया ।

जब शुरू हुआ, कोई ख़ास मिला,
जीने को जैसे आस मिला,
कुछ रंग मिले, कुछ रास मिला,
उमंगों को एहसास मिला,
रूप-सुरूप बहुतेरे,
अपना सा कोई आज मिला,
खास मिला..
गुलाब मिला..
प्यार ओंस बूंद लिए..
सोच किया,
तुझे
विचार किया,
मैंने कई-कई बार किया,
कैसे कहूं गुजरे वक़्त को,
मै कैसे कई-कई बार जिया ॥

साँसों की यूँ बाँधी डोरी,
मोटी की माला सी,
टूटे तो बिखर जाए,
साथ रहे तो सजे रहे,
दिया और बाती सी..
चदन संग पानी सी..

लड़ते-झगड़ते, प्यार पे मरते,
संग-संग बाधा हर तरते,
इक-दूजे को जहान मान कर,
नित अभिनव, श्रद्धा अर्पण त्यों करते,
कभी, बहुत बड़ों सा,
तो कभी बच्चों सा व्यवहार किया,
सोच किया
तुझे,
विचार किया,
मैंने कई-कई बार किया,
कैसे कहूं गुज़रे वक़्त को,
मैं कैसे कई-कई बार जिया "दिव्यंकर"

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