"प्रेम पत्र..... तेरे नाम..."
कभी मैंने भी एक प्रेम पत्र लिखा था...
और छुपा दिया था किताब में.. और सोचा था जब हम एक दूसरे से तारुफ होंगे तब उसे दूँगा
और कहूँगा कि घर जाके पढ़ना.. पर शायद हमारी किस्मत में मुलाक़ात ही नही थी...
और मेरे वो जज्बात बस लाल श्याही कि तरह लाल ही रह गए... और वक्त के साथ धुंधले पड गए...
आज जब वो प्रेम पत्र हाथ लगा तो आँखों से एक जल धारा बह निकली.. और फिर पुरानी बातें ताज़ा हो गई...
उसी प्रेम पत्र कि एक छवि... आपके सामने...
मेरे शब्द उस तक तो नही पहुंचे पर शायद आप तक पहुंच जाए.....
आज हाथ में वो खत लगा..
जो तुम्हे लिखा था एक रोज़..
अपने अरमान लिखे थे.. जज्बात लिखे थे..
दिन रात और मैंने शाम लिखे थे..
मैंने अपने पल तेरे नाम लिखे थे..
तुझसे मिलने कि चाहत में..
इंतज़ार लिखा था..
अकेले कैसे हंसते हैं हम..
या अकेले कैसे रोते हैं..
तेरे रूठ जाने पर दिल कैसे टूट जाता है..
तेरे मनाने को एक नया ख्याल कैसे दिल में उतर आता है..
तुझसे बातें करते हुए दिल कैसे बच्चा बन जाता है..
मैंने मोहब्बत तमाम लिखी..
थोड़ी तकरार लिखी..
एक गुलाब और फिर बातें हज़ार लिखी..
तुझसे मिलने कि आरजू..
अपना हाल लिखा..
तुम्हारा हाल पूछा.., घर में सब कैसे हैं..
माँ पापा को प्रणाम लिखा..
मैंने तुम्हे के पत्र लिखा..
प्रेम पत्र लिखा.
अपने दिल का हाल लिखा... “दिव्यंकर”
कभी मैंने भी एक प्रेम पत्र लिखा था...
और छुपा दिया था किताब में.. और सोचा था जब हम एक दूसरे से तारुफ होंगे तब उसे दूँगा
और कहूँगा कि घर जाके पढ़ना.. पर शायद हमारी किस्मत में मुलाक़ात ही नही थी...
और मेरे वो जज्बात बस लाल श्याही कि तरह लाल ही रह गए... और वक्त के साथ धुंधले पड गए...
आज जब वो प्रेम पत्र हाथ लगा तो आँखों से एक जल धारा बह निकली.. और फिर पुरानी बातें ताज़ा हो गई...
उसी प्रेम पत्र कि एक छवि... आपके सामने...
मेरे शब्द उस तक तो नही पहुंचे पर शायद आप तक पहुंच जाए.....
आज हाथ में वो खत लगा..
जो तुम्हे लिखा था एक रोज़..
अपने अरमान लिखे थे.. जज्बात लिखे थे..
दिन रात और मैंने शाम लिखे थे..
मैंने अपने पल तेरे नाम लिखे थे..
तुझसे मिलने कि चाहत में..
इंतज़ार लिखा था..
अकेले कैसे हंसते हैं हम..
या अकेले कैसे रोते हैं..
तेरे रूठ जाने पर दिल कैसे टूट जाता है..
तेरे मनाने को एक नया ख्याल कैसे दिल में उतर आता है..
तुझसे बातें करते हुए दिल कैसे बच्चा बन जाता है..
मैंने मोहब्बत तमाम लिखी..
थोड़ी तकरार लिखी..
एक गुलाब और फिर बातें हज़ार लिखी..
तुझसे मिलने कि आरजू..
अपना हाल लिखा..
तुम्हारा हाल पूछा.., घर में सब कैसे हैं..
माँ पापा को प्रणाम लिखा..
मैंने तुम्हे के पत्र लिखा..
प्रेम पत्र लिखा.
अपने दिल का हाल लिखा... “दिव्यंकर”
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