अभी कॉल आया.. था..
बीते कल का..
कह रहा था.. रस्मे मोहब्बत कभी थी ही नही तुमसे...
वो मेरा वास्ता ही नही था.. कभी इबादत जनून-ए-इश्क से
फिर भी तुमसे प्यार किया...
मजबूरी थी
या मेरी बेवफाई
इसे तुम जो भी समझो..
पर दूर जाना था तुमसे...
मै दूर हूँ..
तुम भी आगे बढ़ जाना...
.........
नादाँ इबादत होती है..
किसे मोहब्बत जिंदगी होती है..
जिस सोच में तुम शामिल हो..
जिस दिल में तुम रहते हो..
खुद से कई बार लड़ता हूँ..
मै मरता पर उन हसीं लम्हों में जिया करता हूँ..
मै आगे बढ़ नही सकता..
और पीछे हट नही सकता..
............
तेरी रजा थी..
या उस कि सज़ा..
किस्मत में
अब मै हूँ..
तू है और तन्हाई है..... "दिव्यंकर"
बीते कल का..
कह रहा था.. रस्मे मोहब्बत कभी थी ही नही तुमसे...
वो मेरा वास्ता ही नही था.. कभी इबादत जनून-ए-इश्क से
फिर भी तुमसे प्यार किया...
मजबूरी थी
या मेरी बेवफाई
इसे तुम जो भी समझो..
पर दूर जाना था तुमसे...
मै दूर हूँ..
तुम भी आगे बढ़ जाना...
.........
नादाँ इबादत होती है..
किसे मोहब्बत जिंदगी होती है..
जिस सोच में तुम शामिल हो..
जिस दिल में तुम रहते हो..
खुद से कई बार लड़ता हूँ..
मै मरता पर उन हसीं लम्हों में जिया करता हूँ..
मै आगे बढ़ नही सकता..
और पीछे हट नही सकता..
............
तेरी रजा थी..
या उस कि सज़ा..
किस्मत में
अब मै हूँ..
तू है और तन्हाई है..... "दिव्यंकर"
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