Wednesday, 26 June 2013

अधूरे लिखे शब्द...

खुद के बारे में कहूँ तो बस इतना ही काफी है .. " अधूरे  लिखे शब्द "

मेरा ये ब्लॉग मेरे  जीवन के उस पहलू  को दर्शाता है जिसे समाज कभी स्वीकार नही करता..
जो समाज कि नज़र में एक अपराध है या यूँ कि व्यर्थ है..

प्रेम समाज कि नजरों में हमेशा ही दंडनीय रहा है.. और फिर अगर ये ही प्रेम "homosexuality" पर आधारित हो तो सवाल और उठते हैं..!! बस अपने जीवन के उसी पहलू को दर्शाने कि कोशिश
"अधूरी लिखी कहानियों का कोई शीर्षक नही होता"


No comments:

Post a Comment